भगवान शिव का जन्म कैसे हुआ (रहस्य से उठा पर्दा)





इस दुनिया में बोहत किसम के इंसान रहते है और हर इंसान का सोच अलग अलग होता है और कुछ लोग अधूरी जानकारी की वजह से गलत बाते करते है, में कुछ दिन पहले अपने एक दोस्त के घर गया था तो वहा मेने देखा की कुछ लोग बात कर रहे है की शिव लिंग क्या है? लोग क्यों शिव लिंग की पूजा करते है, भगवान शिव का जन्म कैसे हुआ और भी बोहत कुछ.

तो उस वक़्त मेरे दिमाग में खेयाल आया की उन लोगो की तरह और भी बहोत लोग होंगे जिनको इस बात का पता नही होगा और शायद आपको भी इस बारे में ज्यादा पता ना हो तो चलिए आज हम जानते है भगवान शिव का जन्म कैसे हुआ.




भगवान शिव निराकार है जिनका कोई आकार नही होता, वो हर जगह बसते है, लोग जिसे अल्लाह, God  बोलते है सब एक ही है, उनका रूप किसी इंसान की तरह नही है.

जब भगवान शिव ने सोचा की सृष्टि का निर्माण किआ जाए तो उन्होंने भगवान बिष्णु को जन्म दिया और भगवान बिष्णु के नावी से परमपिता ब्रम्हा का उत्पन्न हुआ लेकिन जब दोनों का जन्म हुआ तो उन्हें ये ही नही पता था की वो कहा से आये है,

वो दोनों बोहत ही शक्तिशाली थे और बात बात में दोनों में बेहेस शुरू हो गयी की कोन ज्यादा शक्तिशाली है और इस बात पर वो दोनों आपस में ही लड़ने लगे, ये युद्ध करीब दस हज़ार साल तक चला तब भगवान शिव एक बिशाल पत्थर के रूप में उन दोनों के बिच में आ गए और तब आकाश्बानी हुई की जो भी इस पत्थर का आरम्भ या अंत पा लेगा उसको ही सबसे शक्तिशाली माना जाएगा तब भगवान बिष्णु निचे की तरफ गए और ब्रम्हाजी ऊपर की तरफ.

जब बोहत सालो तक भगवान बिष्णु को उस पत्थर का अंत नही मिला तो वो वापस आये और उन्होंने कहा हे महान शक्तिशाली प्रभु इसका कोई अंत नही है मुझे माफ़ करे ये मेरी अज्ञानता था की में खुदको सबसे शक्तिशाली समझ रहा था और दूसरी तरफ ब्रम्हाजी को उस पत्थर का आरम्भ नही मिला और उन्होंने सोचा में जाकर कह देता हु की मुझे आरंभ मिल गया है फिर में बिष्णु से बड़ा माना जाऊंगा ये सोच कर वो वापस आये और घमंड में बोले मेने उस पत्थर का आरम्भ खोज लिया है तब फिर आकाश्बानी हुई ये शिव लिंग है और मेरा कोई आकार नही है में निराकार हु और भगवान शिव तो सबकुछ जानते ही थे तो उन्होंने भगवान बिष्णु को आशिर्बाद दिया और ब्रम्हा को झूट बोलने के लिए श्राप दिया की तुम्हारी कभीभी पूजा नही होगी.




इस घटना के बाद से भगवान शिव को शिव लिंग के रूप में पूजा गया तब भगवान ब्रम्हा और बिष्णु ने उनसे प्रार्थना की, की भगवान आप हमारे जैसे समान रूप में हमारे साथ रहे तब उस लिंग से भगवान शिव बाहर आये जिन्हें शिव शंकर महादेव कहा गया जो शिव के रूप में है जैसे की बिष्णु और ब्रम्हा.

भगवान शिव शंकर के पांच मुख है और उनकी पत्नी माता गायत्री के भी पांच मुख थे.

माता गायत्री ही माता सती, माता शक्ति और माता पार्वती है, माता गायत्री को प्रकृति भी कहा जाता है जिनकी हम सभी पूजा करते है.

कहा जाता है की जितने भी देवी देवता है वो सभी भगवान शिव का ही धेयान करते है, जब ब्रम्हा, बिष्णु और महेश मिलते है तो ज्योति का एक बिंदु बनता है जिससे ये सारा संसार है, ब्रम्हा, बिष्णु और महेश ये तीनो एक ही है, उनमे से कोई छोटा या बड़ा नही है, बिष्णु शिव की पूजा करते है और शिवजी बिष्णु की पूजा करते है इनमे से कोई छोटा बड़ा नही है और न ही कोई ऊपर निचे है.

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भगवान शिव का जन्म कैसे हुआ ?

इस बात का जवाब यही है की भगवान शिव का न ही कोई जन्म हुआ और न ही कोई मृत्यु, शिव की न ही कोई शुरुवात है और न ही कोई अंत, वो निराकार है.

जो चीज़ जन्म लेती है उसे मरना पड़ता है, जो शुरू होता है उससे ख़तम होना पड़ता है पर भगवान शिव इन सबसे परे है उनका कोई जन्म नही हुआ और नहीं कभी उनका अंत होगा, वो सबसे पहले है और सबसे अंत तक रहेंगे.

भगवान शिव इस ब्रह्माण्ड के मालिक है, वो ही सबकी सृष्टीकर्ता है और वो ही बिनाश्कर्ता.




आशा करता हु भगवान शिव के बारे में दिए गए इस जानकारी से आपको लाभ होगा, कृपया इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और इस तरह के और भी जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहे हम हर रोज़ कुछ न कुछ नया आपके लिए लाते रहते है और अगर आपका कोई सवाल है या फिर आपको कोई जानकारी चाहिए तो निचे कमेंट कीजिये हम आपकी ज़रूर सहायता करेंगे.

धन्यवाद.

भारत माता की जय.

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